हर साल 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस (International Labour Day या May Day) मनाया जाता है। यह दिन मेहनतकश लोगों के अधिकारों और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है। लेकिन इसके पीछे कई ऐसी बातें और इतिहास छिपा है, जिनसे आम लोग आज भी अनजान हैं।
1. मजदूर दिवस की शुरुआत अमेरिका में हुई थी, न कि रूस या भारत में
1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में हज़ारों मज़दूरों ने 8 घंटे काम के नियम को लागू करने की मांग की थी। 1 मई को इस आंदोलन की शुरुआत हुई, और 4 मई को ‘हेमार्केट नरसंहार’ हुआ। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़दूरों के अधिकारों की चर्चा शुरू हुई।
2. भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई (मद्रास) से हुई थी
भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मनाया गया था। इसे लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने चेन्नई में आयोजित किया था। यह कार्यक्रम कॉमरेड सिंगारवेलु चेट्टियार द्वारा आयोजित किया गया था।
3. लाल झंडा पहली बार इसी दिन भारत में फहराया गया था
चेन्नई में 1923 के कार्यक्रम में पहली बार भारत में लाल झंडा (जो श्रमिक आंदोलनों का प्रतीक है) सार्वजनिक रूप से फहराया गया था।
4. कई देशों में यह दिन छुट्टी नहीं होता
हालाँकि 80 से ज़्यादा देशों में यह दिन सार्वजनिक अवकाश होता है, लेकिन अमेरिका और कनाडा में ‘Labour Day’ सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है — न कि 1 मई को।
5. भारत का पहला श्रम क़ानून ब्रिटिश राज में 1881 में आया था
यह कानून ‘फैक्ट्री एक्ट 1881’ के नाम से जाना जाता है। इससे पहले मज़दूरों के लिए कोई भी स्पष्ट कार्य समय, अवकाश या स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
6. भारत में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या 90% से ज्यादा है
अभी भी भारत में कुल मजदूरों का 90% से अधिक हिस्सा असंगठित क्षेत्र (जैसे निर्माण, खेतिहर, घरेलू कामगार) से आता है, जिन्हें श्रम अधिकारों की सीमित पहुंच मिलती है।
7. ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन) की स्थापना मजदूरों के लिए ही हुई थी
1919 में स्थापित ILO का उद्देश्य दुनियाभर के मजदूरों के लिए बेहतर कामकाजी परिस्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना था। भारत ILO का संस्थापक सदस्य है।
8. मजदूर दिवस सिर्फ श्रमिकों के लिए नहीं, सामाजिक चेतना के लिए भी है
यह दिन यह याद दिलाता है कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ उसके मजदूर हैं। उनकी भलाई, सम्मान और जीवन की गुणवत्ता समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।
मजदूर दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की लड़ाई की पहचान है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे आसपास जो विकास, सुविधाएँ और संरचनाएँ हैं — उनके पीछे किसी न किसी मेहनतकश का पसीना है।


