रवि और उसके दोस्त एक सुनसान गाँव की पुरानी हवेली में गए, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ आत्माएँ भटकती हैं। हवेली खंडहर बन चुकी थी, लेकिन दीवारों पर अजीब निशान और फर्श पर जली हुई मोमबत्तियाँ पड़ी थीं।
जैसे ही वे अंदर घुसे, दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। हवा ठंडी हो गई, और किसी के फुसफुसाने की आवाज़ आई। अचानक, एक परछाईं सीढ़ियों से उतरती दिखी। उसके लाल चमकते आँखें थीं और वह सरकती हुई उनकी ओर बढ़ रही थी।
डर के मारे सभी दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश करने लगे, लेकिन तभी एक दोस्त, सुमित, अचानक ज़मीन पर गिर पड़ा। उसके गले पर नीले निशान उभर आए, जैसे किसी ने उसे दबोच लिया हो। डर से कांपते हुए, रवि ने जेब से भगवान का लॉकेट निकाला और जोर से मंत्र पढ़ने लगा।
अचानक, एक भयानक चीख सुनाई दी और परछाईं गायब हो गई। दरवाज़ा खुल गया, और सभी भागकर बाहर आए। लेकिन सुमित फिर कभी पहले जैसा नहीं रहा—उसकी आँखों में हमेशा डर बसा रहा।


