22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर की शांत और सुरम्य पहलगाम घाटी उस वक्त खून से लाल हो गई जब आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों पर हमला कर दिया। यह हमला बाइसारन घाटी में हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग घूमने और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंचे थे। अचानक कुछ बंदूकधारी आतंकी वहां पहुंचे और ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे।
धर्म पूछकर हत्या – इंसानियत पर हमला
गवाहों के अनुसार, आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका धर्म पूछा और फिर चुनकर गोली मार दी। यह इंसानियत पर सीधा हमला था। इस हमले में 26 लोग मारे गए और कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है।
शोक की लहर – देशभर से प्रतिक्रियाएं
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश और शोक की लहर फैल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अपनी विदेश यात्रा को बीच में छोड़ भारत लौटने का फैसला किया। राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री और कई विपक्षी नेताओं ने इस कायरतापूर्ण हमले को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ बताया।
पर्यटन पर पड़ा गहरा असर
कश्मीर में बीते कुछ सालों से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। 2024 में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंचे थे। लेकिन इस हमले के बाद कई लोगों ने अपनी बुकिंग्स रद्द कर दी हैं, जिससे स्थानीय व्यवसायियों को बड़ा झटका लगा है। घाटी में डर का माहौल है और लोग सहमे हुए हैं।
आतंकी संगठन TRF ने ली जिम्मेदारी
इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) नाम के आतंकी संगठन ने ली है, जो पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है। उनका दावा है कि यह हमला घाटी में ‘बाहरी बसावट’ के खिलाफ किया गया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकी पाकिस्तान से आए थे।
भारत की सख्त कार्रवाई
भारत सरकार ने इस हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इंदस जल संधि और SAARC वीजा छूट जैसे कई समझौते निलंबित कर दिए गए हैं। साथ ही भारत-पाक सीमा पर यातायात भी रोक दिया गया है।
यह हमला न सिर्फ निर्दोष लोगों की जान लेने वाला था, बल्कि यह कश्मीर की शांति, पर्यटन और विकास के प्रयासों को पीछे धकेलने की साजिश भी थी। ऐसे वक्त में देश को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देना होगा। अब वक्त है कि आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई बाइसारन जैसी भयावह घटना दोहराई न जा सके।


