नारी केवल एक दिवस की आराधना नहीं,
अपितु सतत सम्मान की अधिकारिणी है।
वह कोई निर्बल प्रतिमा नहीं,
अपितु सृजन की मूलाधारिणी है।
उसकी स्वच्छंदता सीमाओं में न बंधे,
उसकी पदचाप सुनसान मार्गों पर भी निर्भीक गूंजे।
न कोई भय हो, न कोई संकोच,
न कोई अवरोध, न कोई विघ्न।
लिंग का भेद मिटे, स्वप्न बाधा-विहीन हों,
उसकी आकांक्षाएँ आकाश को आलिंगन करें।
केवल प्रेरणा ही नहीं, अपितु उसकी शक्ति बनो,
उसकी आशाओं का दीप प्रज्वलित करो।
एक दिवस नहीं, अपितु प्रत्येक दिवस,
नारी को सम्मान, सुरक्षा एवं समानता का संबल दो,
क्योंकि वह सृष्टि की आधारशिला है,
उसके बिना यह संसार अधूरा है।


